बिहार पुलिस के जवान ने शराबबंदी कानून को दिखाया ठेंगा, नशे की हालत में घंटों झूमता रहा सिपाही

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PATNA : बिहार में शराबबंदी है और इस कानून का सख्ती से पालन करने और करवाने की हिदायत पुलिस विभाग को दी जा चुकी है, इसके बावजूद सूबे में इस कानून को कैसे कानून के रखवाले ही तोड़ रहे हैं? इसकी ताज़ा मिसाल मुंगेर ज़िले में दिखी जहां एक पुलिस विभाग का एक सिपाही ही शराब पीकर नशे की हालत में झूमता हुआ दिखा और इसी हालत में उसने खुलेआम पिस्तौल लहराकर दहशत का माहौल बनाने की कोशिश भी की। ये सिपाही मुंगेर के डीआईजी दफ्तर में कार्यरत बताया जा रहा है।

 

दो साल में 1.61 लाख लोग गिरफ्तार, सजा सिर्फ 141 को, खुलेआम बिक रही शराब : बिहार में शराबबंदी के दो साल पूरे हो चुके हैं। इसे प्रभावी बाने के लिए छह लाख से अधिक छापेमारी की गई। एक लाख से अधिक FIR दर्ज किए गए। 1.5 लाख से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। राज्‍य में लगभग 25 लाख लीटर देशी-विदेशी शराब की रिकार्ड बरामदगी भी हुई। शराबबंदी के दौरान अपराध मे कमी के आंकड़े भी अपनी जगह हैं। लेकिन सच यह भी है कि राज्‍य में शराब तस्‍करी का नया चैनल भी खुला। इसे कानून के रखवालों का भी संरक्षण मिलने लगा। तस्‍करी के नए-नए तरीके अपनाए गए।

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राज्य में शराब पीने, बिक्री, निर्माण और परिवहन पर प्रतिबंध के बाद से गिरफ्तारी का आंकड़ा डेढ़ लाख को भी पार कर गया है। बिहार में शराबबंदी से जुड़े आंकड़े बेहद चौकानेवाले हैं। शराबबंदी के बाद भले ही मुकदमे और गिरफ्तारी की संख्या हजारों और लाखों में है, पर सजा की रफ्तार बेहद सुस्त है। इस वर्ष 12 सितम्बर तक सिर्फ 141 को सजा हुई। इनमें 52 पीने वाले, जबकि शराब बेचने वाले 89 अभियुक्त शामिल हैं। वहीं उत्पाद विभाग द्वारा दर्ज मुकदमों में सर्वाधिक मामले शराब पीने से जुड़े हैं।

1.33 लाख से अधिक मामले दर्ज : बिहार में शराबबंदी कानून के तहत अप्रैल 2016 से 12 सितम्बर 2018 तक एक लाख 33 हजार, 339 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 52 हजार, 185 मामले उत्पाद विभाग जबकि पुलिस ने 81 हजार, 154 प्राथमिकी दर्ज की है। इस दौरान उत्पाद विभाग और पुलिस ने मिलकर एक लाख 61 हजार 620 व्यक्तियों को गिरफ्तारी किया।

उत्पाद विभाग के सर्वाधिक 51 प्रतिशत केस शराब पीने के सेवन से उत्पाद विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उसके द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों में सबसे ज्यादा मामले शराब के सेवन से जुड़ा है। दो वर्ष से ज्यादा की अवधि में दर्ज इन मुकदमों में 30 हजार 711 यानी 51.88 प्रतिशत मामले पीनेवालों से संबंधित है। वहीं शराब बेचने के आरोप में 14 हजार 705 मामले दर्ज किए गए। इसका प्रतिशत 33.26 है। जबकि शराब जमा करने और उसके परिवहन से जुड़े मामलों का प्रतिशत क्रमश: 8.90 और 5.96 प्रतिशत है।

शराबबंदी के भ्रष्‍ट पुलिसकर्मियों की बढ़ी कमाई : शराबबंदी में भ्रष्‍ट पुलिसकर्मियों की कमाई काफी बढ़ गई है। इसका एक बड़ा उदाहरण है बिहार के मुजफ्फरपुर के निलंबित एसएसपी विवेक कुमार। विवेक कुमार पर शराब माफिया से मिलीभगत का आरोप है। बताया जाता है कि हरियाणा के शराब माफिया से उनकी बात होती थी। उनके मुजफ्फरपुर स्थित सरकारी आवास के अलावा दिल्ली, पटना व यूपी के सहारनपुर स्थित उनके पैतृक आवास समेत अन्य ठिकानों पर भी विजिलेंस की जांच के बाद यह सामने आया कि शराबबंदी के बाद उनकी कमाई काफी बढ़ गई थी।