छाती पर कलश रख कर मां दुर्गा की उपासना कर रही 2 कन्या और 3 महिला, पूरे नौ दिनों तक करेंगी साधना

Durga temples

Patna : पवित्र चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए नगर और ग्रामीण क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने पूजा कर विश्व शांति और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।पवित्र चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रहमचारिणी की सोमवार को पूजा अर्चना करने के लिए दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने उपवास भी रखा। लेकिन इनसब में अगर बात करें कुछ करिश्मा की तो वो बहुत निराली है।

बिहार के अररिया जिले के कुर्साकांटा के दुर्गा मंदिरों में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हुई। इनमें से एक खास है-कपरफोड़ा स्थित मां दुर्गा मंदिर। इसकी स्थापना 1934 में बिलटू विश्वास ने भलुआ नदी के किनारे की थी। मंदिर में वैष्णवी पद्धति से पूजा होती है। अररिया में मुख्य दुर्गा मंदिर कपरफोड़ा परिसर में भी सीने पर कलश स्थापित कर साधना की जा रही है।दुर्गा मंदिर की स्थापना के बाद एक वर्ष मंदिर में पूजा अर्चना नहीं की गई।

durga pooja

उन्होंने बताया कि एक माह पूर्व से ही दिन में एक बार फलाहार किया, तो किसी ने बताया कि दस दिन पूर्व से अन्न का प्रयोग छोड़ दिया और फल का सेवन किया। दुर्गा मंदिर कपरफोड़ा परिसर में श्रद्धालु भक्तों द्वारा पीठ के बल पर लेटे सीने पर विधि विधान व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापित किया गया है। साधिकाओं से मिली जानकारी अनुसार शरीर पर कलश स्थापना के बाद दस दिनों तक केवल गंगा जल व नारियल के पानी का सेवन किया जाता है।

यहां सीने पर कलश स्थापित कर कष्ट साध्य साधना में लीन मेगरा निवासी 40 वर्षीया रंभा देवी, सिझुआ 40 वर्षीया ज्ञानी देवी, सिझुआ निवासी 14 वर्षीया मनीषा कुमारी, लक्ष्मीपुर की 16 वर्षीया विनीता कुमारी, बघुआ गोसनगर 35 वर्षीया हरण देवी शामिल हैं। दुर्गा मंदिर की स्थापना के बाद एक वर्ष मंदिर में पूजा अर्चना नहीं की गई। जिसके परिणाम स्वरूप विश्वास परिवार चेचक के चपेट में आ गया। जिससे परिवार के तीन लोग भगवान को प्यारे हो गए। साथ ही दर्जनों मवेशी की अज्ञात बीमारी से ग्रसित होने से भगवान को प्यारे हो गए।

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