बिना हॉलमार्क के नहीं खरीद पाएंगे सोना, सरकारी आदेश जारी

Patna: बिहार में केंद्र सरकार जल्द ही कानूनी बनने जा रही है जिसके बाद से बिना हॉलमार्क के किसी भी तरह के सोने के आभूषण नहीं बिक सकेंगे। तो वहीं बिना हॉलमार्किंग वाले आभूषण बेचना अपराध की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। साथ ही बाजार में केवल 14, 18 और 22 कैरेट के गहने ही बेचे जा सकेंगे, जिनके साथ उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।

दरसल पिछले महीने 16 नवंबर को विश्व मानक दिवस पर उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा था कि केंद्र सरकार जल्द ही सोने के गहने पर हॉलमार्किंग को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने जा रही है। तिथि की घोषणा शीघ्र होने की उम्मीद है। तो वहीं इस पर बीआइएस के सेक्शन ऑफिसर जीपी सिंह ने कि ग्राहक आभूषण खरीदारी के बाद शुद्धता के उल्लेख के साथ रसीद जरूर लें। अगर गुणवत्ता संबंधी कोई शिकायत हो तो भारतीय मानक ब्यूरो के पटना केंद्र से लिखित शिकायत करें, इन पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही इस पर पाटलिपुत्र सराफा संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि बिहार में 25 हजार से अधिक ज्वैलर्स हैं। हॉलमार्किंग के बाद जागरूकता बढ़ रही है। बीआइएस के सूत्रों ने कहा कि प्रति माह 10 से 15 आवेदन मिल रहे हैं।

आपको बता दें कि देश में फिलहाल 653 आंकलन और हॉलमार्किंग सेंटर हैं। इन में 18 बिहार में हैं। जहां पटना में 10, मुजफ्फरपुर में दो और बक्सर, आरा, रोहतास, दरभंगा, बेगूसराय, गया में एक-एक सेंटर हैं। इन सेंटरों पर महज 35 रुपये प्रति आभूषण हॉलमार्क होता है। खरीदार भी अपने आभूषणों की शुद्धता की परख यहां कर सकते हैं। बिहार में कुल 766 ज्वैलर्स के पास हॉलमार्क निबंधन है। इसमें 680 गोल्ड और 86 सिल्वर हॉलमार्क के ज्वैलर्स शामिल हैं।

आपको ये भी बता दें कि हॉलमार्क के तहत कुल पांच निशान होते थे। वर्ष 2017 में इसमें से साल के निशान को हटा दिया गया था। अब हॉलमार्क के तहत आभूषणों पर चार निशान ही लगाए जाते हैं। इसमें बीआइएस का लोगो, शुद्धता का अंक(916-22 कैरेट, 750-18 कैरेट, 585-14 कैरेट), असेइंग सेंटर का लोगो और विक्रेता शोरूम का लोगो शामिल होता है। इन निशान को मैग्निफाइंग ग्लास से देख सकते हैं क्योंकि यह लेजर मार्किंग मशीन से लगाए जाते हैं।

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