यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल है मिथिला का यह जानकी मंदिर, दुनियाभर से आते हैं लाखों लोग

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PATNA : इस बार 19 नवंबर, सोमवार को देवउठनी एकादशी है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु नींद से जागते हैं। इस दिन तुलसी और शालिग्राम शिला का विवाह करने की भी परंपरा है। शालिग्राम शिला को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। शालिग्राम शिला नेपाल की गंडकी नदी से निकलती है। नेपाल में अनेक हिंदू मंदिर भी हैं, जो विश्व प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको उन्हीं के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं…

जानकी मंदिर : यह मंदिर नेपाल के जनकपुर में एक ऐतिहासिक स्थल है। यह मंदिर देवी सीता को समर्पित है। यह हिंदू मंदिर नेपाल के जनकपुर के केंद्र में स्थित है। राजा जनक के नाम पर शहर का नाम जनकपुर रखा गया था। राजा जनक की पुत्री सीता जिन्हें जानकी भी कहते हैं, उनके नाम पर इस मंदिर का नामकरण हुआ था। यह नगरी मिथिला की राजधानी थी। जानकी मंदिर साल 1911 में बनकर तैयार हुआ था। क़रीब 4860 वर्ग फ़ीट में फैले इस मंदिर का निर्माण टीकमगढ़ की महारानी कुमारी वृषभानु ने करवाया था। जनकपुर के स्थानीय पत्रकार बृज कुमार यादव के मुताबिक इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक कहानी है। उन्होंने बताया कि ‘पहले यहां जंगल हुआ करता था, जहां शुरकिशोर दास तपस्या-साधन करने पहुंचे थे। यहां रहने के दौरान उन्हें माता सीता की एक मूर्ति मिली थी, जो सोने की थी। उन्होंने ही इसे वहां स्थापित किया था।’ टीकमगढ़ की महारानी कुमारी वृषभानु एक बार वहां गई थीं। उन्हें कोई संतान नहीं थी। वहां पूजा के दौरान उन्होंने यह मन्नत मांगी थी कि अगर भविष्य में उन्हें कोई संतान होती है तो वो वहां मंदिर बनवाएंगी। संतान की प्राप्ति के बाद वो वहां लौटीं और साल 1895 में मंदिर का निर्माण शुरू हुआ और 16 साल में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ। ऐसा कहा जाता है कि उस समय इसके निर्माण पर कुल नौ लाख रुपए खर्च हुए थे, इसलिए इस मंदिर को नौलखा मंदिर भी कहते हैं।

पशुपतिनाथ मंदिर : भगवान शिव का यह मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से 3 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बागमती नदी के किनारे देवपाटन गांव में स्थित है। अपने ऐतिहासिक महत्व की वजह से यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किया गया है। इस मंदिर में केवल हिंदू ही जा सकते हैं। मुक्तिनाथ मंदिर : यह मंदिर नेपाल के सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है। यह मंदिर बौद्ध और हिंदू दोनों के लिए विशेष है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से यहां आने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मनोकामना मंदिर : यह मंदिर काठमांडू से 105 किलोमीटर दूर गोर्खा जिले में स्थित है। मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। नेपाल का यह मंदिर शक्तिपीठ के रूप में भी प्रसिद्ध है। मंदिर में एक ऐतिहासिक विशाल घंटा भी है। जो भी भक्त यहां आता है, वो यह घंटा जरूर बजाता है।

बुदानिकंथा : यह मंदिर काठमांडू से 8 किलोमीटर दूर शिवपुरी पहाड़ी के नीचे स्थित है। यहां 11 नागों की सर्पिलाकार कुंडली पर लेटे हुए भगवान विष्णु की प्रतिमा है। इसे देखने से दूर-दूर से श्रृद्धालु यहां आते हैं।

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