सीएम नीतीश से सवर्ण और मुस्लिम समाज का हुआ मोह भंग, फ्लॉप हो रही है जदयू की रैलियां

PATNA : बिहार में बहार है नीतीशे कुमार है….लगता है बिहार में सीएम नीतीश कुमार का वह पुराना क्रेज समाप्त होता जा रहा है। जिस तरह से विगत कुछ महीनों में जदयू की रैलियां फ्लाप हो रही है उससे साफ पता चल रहा है कि बिहार का सवर्ण समाज और मुस्लिम समाज इस बार नीतीश कुमार के विरोधी बन गए हैं।

जानकारी अनुसार सुप्रीम कोर्ट के एससीएसटी कानून पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अध्यादेश लाने के बाद सवर्ण समाज में केंद्र की मोदी सरकार और राजग गठबंधन के खिलाफ अच्छा खासा आक्रोश देखा जा रहा है। संभवत: यहीं कारण है कि जगह जगह धरना प्रदर्शन और काले झंडे दिखाखर सीएम नीतीश का विरोध किया जा रहा है। पटना की एक कार्यक्रम के दौरान सीएम नीतीश कुमार पर चप्पल फेंकने का प्रयास भी किया गया था। आक्रोशित युवक ने सीएम नीतीश कुमार पर आरोप लगाया था कि आरक्षण के कारण हमारी जिंदगी खराब हो रही है।

दूसरी ओर वर्तमान केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जो राम मंदिर के नाम पर राजनीति की जा रही है उसको लेकर बिहार का मुस्लिम समाज नीतीश की रैलियों में आने से बच रहे हैं। सूत्रों की माने तो कई मुस्लिम विधायकों ने सीएम नीतीश कुमार को बंद कमरे में साफ कर दिया है कि अगर ऐसा ही चलता रहा था तो लोक सभा और विधान सभा चुनाव में जदयू को घाटा हो सकता है। उधर अल्पसंख्य वोट को ठीक करने के जदयू नेता प्रशांत किशोर दिन रात एक किए हुए हैं।

मटन-चिकेन बिरयानी के बाद भी फ्लाफ रही JDU की पटना रैली, नहीं पहुंचे लोग, खाली रही कुर्सियां : राजनीति में ऐसे थोड़बे ने हीरो बनते हैं। इसके लिए कई तरह के पापड़ बेलने पड़ते हैं तब जाकर कोई सफल होता है और कोई असफल। वैसे आज तक नेता लोग समय समय पर जनता को ठगते रहे हैं, लेकिन लगता है अब जनता ने नेताजी को ठगना शुरू कर दिया है।

ताजा अपडेट अनुसार राजधानी पटना में मटन और चिकेन बिरयानी भी मुसलमान कार्यकर्ताओं को रिझाने में विफल रही। पटना के एसकेएमसीएच में आयोजित जेडीयू के अल्पसंख्यक कार्यकर्ता सम्मेलन में जो तस्वीर दिखी वो पार्टी के लिए पूरी तरह से निराशाजनक थी। पटना जिला के अल्पसंख्यक कार्यकर्ता सम्मेलन में आधी से अधिक कुर्सियां खाली रह गईं। इस सम्मेलन में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और आरसीपी सिंह भी मौजूद थे। सम्मेलन के जरिये जेडीयू की कोशिश थी कि अल्पसंख्यकों को रिझाया जाए लेकिन ऐसा हो न सका। अल्पसंख्यक सम्मेलन में आने वाले कार्यकर्ताओं के लिए लजीज व्यंजन बनाए गए थे। मेनू में मटन बिरयानी और चिकेन बिरयानी की व्यवस्था थी फिर भी कार्यकर्ता नहीं पहुंचे।

खानसामों के मुताबिक कार्यकर्ताओं की भूख मिटाने के लिए 6 क्विंटल मटन की व्यवस्था की गई थी और 4000 लोगों के खाने की व्यवस्था की गई थी लेकिन कुर्सियां खाली रह गई। ये व्यवस्था अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद फिरोज अहमद की तरफ से की गई थी। सभा के दौरान हॉल की कुर्सियां खाली रह गई तो कार्यक्रम के आयोजक पर मंत्री जी भड़क गए। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद ने कहा कि ये बेहद शर्म की बात है कि इतने बड़े कार्यक्रम में हॉल तक नहीं भर पाया। मंत्री ने कहा कि मंच पर बैठे लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन इससे ज्यादा जरूरी था इस सम्मेलन तक लोगों को लाना। हालांकि कुर्सियां खाली रहने के बाद भी अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री का ये दावा था कि बिहार के मुसलमान नीतीश कुमार के ही साथ हैं।