FLASHBACK : समस्तीपुर में कर्पूरी ठाकुर ने तोड़ा था कांग्रेस की जीत का सिलसिला

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PATNA : कांग्रेस की जीत का सिलसिला तोड़कर समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र को समाजवादियों का गढ़ बनाने में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर ने अहम भूमिका निभाई थी। 1977 के लोकसभा चुनाव में समस्तीपुर में पहली बार कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था। उसके बाद से समस्तीपुर समाजवादियों का गढ़ बन गया। 1977 के बाद कांग्रेस सिर्फ एक बार ही समस्तीपुर में जीत पायी।

आजादी के बाद 1952 में पहली बार हुए आम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में सत्यनारायण सिन्हा ने जीत हासिल की थी। स्वर्गीय सिन्हा ने 1952 के बाद 1957 और 1962 के आम चुनाव में जीत हासिल की। उसके बाद 1962 में ही हुए मध्याविधि चुनाव में सत्यनारायण सिन्हा की जगह कांग्रेस ने यमुना प्रसाद मंडल को प्रत्याशी बनाया, उन्होंने भी जीत दर्ज करने के साथ समस्तीपुर को कांग्रेस का गढ़ बनाये रखने में सफलता हासिल की।

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यमुना प्रसाद मंडल ने1962 के बाद 1967 और 1971 के आम चुनाव में भी जीत हासिल कर सत्यनारायण सिन्हा की तरह ही जीत की तिकड़ी लगायी। लेकिन उसके बाद 1974 में लगे आपातकाल के बाद पूरे देश में कांग्रेस के विरोध में जो तूफान खड़ा हुआ उससे समस्तीपुर भी वंचित नहीं रहा। आपातकाल के खिलाफ संघर्ष में कर्पूरी ठाकुर ने अहम भूमिका निभाई थी, जिसकी वजह से 1977 में आम चुनाव होने पर जनता पार्टी ने उन्हें समस्तीपुर से उम्मीदवार बनाया। जनता ने भी चुनाव में उनका भरपूर साथ दिया, जिसकी वजह से कर्पूरी ठाकुर ने कांग्रेस को भारी मतों से हरा दिया। इस हार के साथ ही समस्तीपुर में कांग्रेस की नींव ऐसी हिली कि वह उसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए आम चुनाव में 1984 में ही जीत हासिल कर पायी। 1984 के चुनाव में रामदेव राय ने जीत हासिल की थी। लेकिन 1989 के चुनाव में फिर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। तब से समस्तीपुर में जीत हासिल करने के जी तोड़ प्रयास के बाद भी कांग्रेस अब तक जीत नहीं पायी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन उसे अंतत: दस हजार एक सौ पच्चीस मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।