बिहार के किशनगंज में तुगलकी फरमान- लुंगी पहनकर अदालत में लोगों को नहीं जाने दिया जाएगा

PATNA : मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदोस्ता हमारा…बचपन में यह गीत आपको भी स्कूल में सीखाया गया है। संदेश साफ है हम भारत के लोग भले किसी मजहब और जाति के हो लेकिन हम भाई हैं। ताजा अपडेट के अनुसार बिहार से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि किशनगंज अदालत संघ की ओर से  जारी इस फरमान में कहा गया है कि लुंगी पहनकर आने वाले लोगों को कोर्ट में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। कहने के लिए बिहार में तो हरेक धर्म के लोग लुंगी पहनते हैं, लेकिन मुस्लिम आबादी वाला क्षेत्र होने के कारण अधिकांश मुस्लिम लोग लुंगी ही ज्यादा पहनते हैं।

क्या लिखा है इस आवेदन में : व्यवहार न्यायालय, किशनगंज के न्यायालय प्रबंधक की ओर से अधिवक्ता संघ किशनगंज के सचिव और जिला अधिवक्ता संघ के सचिव को लिखे गए इस आवेदन में कहा गया है कि महाशय निर्देशानुसार अनुरोध पूर्वक कहना है कि संघ की सभी माननीय अधिवक्तागण अपने-अपने मुवक्किलों को व्यवहार न्यायालय, किशनगंज के परिसर में लुंगी न पहनकर आने का निर्देश देने की कृपा करें।

सोशल मीडिया पर जमकर शेयर और कमेंट कर रहे हैं लोग : Kumud Singh कलकत्‍ता मेट्रो नामक सिनेमा हॉल में धोती पहन कर जाना प्रतिबंधित था..दरभंगा महाराज से आग्रह किया गया कि यह नियम बदलबा दीजिए..वो धोती पहन कर चले गये..नियम बदलना पडा.. Madhav Srimohan हम इतने पिछड़े हैं कि इसको कोई चैलेंज भी नहीं करेगा। यही दिल्ली रहता या पटना भी रहता तो अबतक कोर्ट में मामला पहुँच गया रहता, एक्टिविस्ट और वक़ील टीवी पर आ गए रहते।
मगर अपनी नियति यही है। कोई कुछ भी ऊल-जलूल नियम लागू कर दे, किसी के पास आवाज़ नहीं होती बोलने की।

Rajiv Mishra किशनगंज मे 5 साल के बच्चा भी लूँगी पेहनता हैं। पता नही पर जितने मे लूँगी आती हैं उतने मे बच्चे की 2 हाफ पैंट आ जायेगी पर फिर भी वहां के अधिकांस बच्चे लूँगी ही पेहनते हैं। Anil Kumar Jha पता नहीं, इतनी बुद्धि कहाँ से आती है इनके पास? कुछ भी फरमान जारी कर दिया जाता है! Hari Kumar Das धोती तो पहन कर जा सकता है कि नही. वह भी लुंगी स्टाइल में…

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