असंभव है भगवान हनुमान को धर्म में बांटना, वे तो पवन पुत्र हैं, प्राणवायू हैं : मोरारी बापू

murari bapu

PATNA : दिनकर की भूमि सिमरिया में साहित्य कुम्भ चल रहा है। वहीँ साथ में प्रसिद्ध कथावाचक संत मोरारी बापू के द्वारा राम कथा की पावन धारा भी बह रही है। देश में चल रही वर्त्तमान राजनीती के परिपेक्ष पे कटाक्ष करते हुए राम कथा के पांचवे दिन बुधवार को व्यासपीठ से कथा के एक प्रसंग के दौरान मोरारी बापू ने कहा की, आज पुरे देश में जाती पाती कि चर्चा चल रही है। कोई धर्म अथवा कुछ लोग हनुमान कि जाति खोजने में लगे हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।

 

जैसे वायु, प्राण सबका है, वैसे ही हनुमान सबके हैं। कुछ विशेष घटनाओं कि वजह से ऐसी चर्चाएँ होने लगती है, मगर समाज को इसका खामियाजा शताब्दियों तक झेलना पड़ता है। हनुमान को विवाद का केंद्र बनाना बंद करना चाहिए, क्यूंकि हम सभी से हनुमान का सम्बन्ध है, हनुमान प्राण है। वो किसी एक के नहीं है, बल्कि सबके हैं। बापू ने ऊँची आवाज़ में कहा कि, “हम जोड़ने में पड़े हैं आप तोड़ने में पड़े हो। बाज़ आओ!” नेता या कोई भी अपने निहित स्वार्थ के कारण जब ऐसे निवेदन करता है, जाती पाती के विषय में विवादित चर्चा करता हैं, इससे हिंदुस्तान का नुक्सान हो रहा है। रश्मिरथी के रचियता राष्ट्रकवि दिनकर के जन्मस्थली रसभूमि सिमरिया में राम कथा रस कि वर्षा कर रहे बापू ने दिनकर को ‘आज़ादी कवि’ कहा और इसी आधार पे रामदूत हनुमान जी को ‘प्राणकवि’ कह कर संबोधित किया।

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नौ दिवसीय राम कथा का विषय इस बार है ‘मानस आदिकवि’। मोरारी बापू कि हर राम कथा का अलग अलग विषय होता है। उस विषय को केंद्र में रख कर ही पूरी कथा चलती है और सात्विक तात्विक संवाद होता है। दूसरी बार बेगुसराय में होने वाली बापू के कथा पंडाल में इस बार भी हजारों श्रोताओं के भीड़ उम्र रही है। आम श्रोताओं के साथ साथ कई विशिष्ट संत भी पधार रहें है। इन्टरनेट सेंसेशन बन चुकी सुरीली आवाज़ कि गायिका मैथिलि ठाकुर ने बुधवार को कथा के बाद बापू से मुलाक़ात कि।

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