बालू खनन बंद होने के बाद भी शुरू है माफियाओं का खेल, रात के अंधेरे में हो रहा अवैध कारोबार  

Live Bihar Desk : हर साल तीन महीने के लिए नदियों में बालू खनन पर रोक लगाया जाता है। मगर बालू माफिया प्रशासन को ठेंगा दिखाकर खुलेआम बालू खनन करते हैं। सोन नदी में पानी बढने के साथ ही बालू माफिया रात के अंधेरे का फायदा उठाकर बालू खनन करते हैं। स्थानीय थाना तो दूर की बात है अवैध बालू खनन रोकने के लिए दीघा और हाजीपुर के पास बने तीन ओपी भी बालू माफियाओं के अवैध खनन पर रोक लगाने में नाकाम है। गैर कानूनी तरीके से करोड़ों का कोरबार चलता है।

बालू मफियाओं के कारण सालों पुराने कोइलवर पुर पर खतरा मंडराने लगा है। पुल पर पड़ने वाले तेज धार और बालू माफियाओं द्वारा नदी के तल से बालू का अवैध खनन करने से पुल पर खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा अवैध बालू खनन करने से सरकार के हर दिन 20-22 लाख रुपए राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। बालू खनन रोक के बाद भी बालू माफिया अवैध खनन कर इतनी राशि का बालू निकाल लेते हैं।

स्थानीय लोगों की माने तो सोन में पानी बढ़ने के साथ ही बालू के अवैध कारोबार का खेल शरू हो जाता है। सोन व गंगा के संगम बिंदगाम सहित आस-पास के क्षेत्रों में छपरा की तरफ से कई नावें आती हैं और बालू का अवैध खन/*न करती है। कोइलवर पुल के नीचे से भी अप स्ट्रीम में जाकर बालू खनन होता है। जबकि पुल के नीचे से नाव ले जाने पर रोक लगाया गया है।

एक तरफ जहां अवैध खनन से सरकार को नुकसान हो रहा है वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों और पुलिसवालों की जेब भर रही है। बालू वाले क्षेत्रों के थानों में पोस्टिंग के लिए भी खेल होता है। बिहटा, कोइलवर जैसे थानों में पोस्टिंग के लिए हर कोई तैयार रहता है। स्थानीय लोगों की माने तो एक बार कोइलवर थाने में पोस्टिंग हो जाने के बाद सालों तक किसी थाने का इंचार्ज नहीं होने का कोई मलाल नहीं होता है। इन थानों में इतनी आसानी से भी पोस्टिंग नहीं होती है। इसके लिए ऊपर तक पहुंच होनी जरूरी होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *